विश्वविद्यालय की AI पहल: स्वदेशी, नैतिक और साक्ष्य-आधारित भविष्य की ओर
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने स्वदेशी, नैतिक और साक्ष्य-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समाधानों में अग्रणी बनने हेतु एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। यह पहल देश के तकनीकी विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका को सशक्त करेगी।
प्रो. चतुर्वेदी ने बताया कि टास्क फोर्स का प्राथमिक लक्ष्य भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं और सांस्कृतिक संदर्भ के अनुरूप AI समाधान विकसित करना है। ‘स्वदेशी’ AI का अर्थ है स्थानीय संसाधनों, भाषाओं और सामाजिक संरचनाओं के अनुकूल तकनीकें, जो अधिक प्रासंगिक और प्रभावी हों। यह दृष्टिकोण आत्मनिर्भर भारत को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
कुलपति महोदय ने ‘नैतिक’ AI के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI के तीव्र विकास के साथ, नैतिक सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है ताकि इसके उपयोग से समाज में भेदभाव न हो और यह मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहे। पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही इस कार्यबल के मूलभूत सिद्धांत होंगे, जो AI के जिम्मेदार विकास को सुनिश्चित करेंगे।
टास्क फोर्स ‘साक्ष्य-आधारित’ दृष्टिकोण अपनाएगी। यानी, सभी AI समाधान कठोर शोध, गहन डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होंगे। इससे विश्वविद्यालय द्वारा तैयार तकनीकें न केवल अभिनव होंगी, बल्कि विश्वसनीय और प्रभावी भी सिद्ध होंगी।
प्रो. चतुर्वेदी का दृढ़ विश्वास है कि यह टास्क फोर्स विश्वविद्यालय को अनुसंधान और नवाचार के नए युग में ले जाएगी। यह छात्रों और शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय व वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले AI समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। इस पहल से विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन होगा, जिससे भारत AI के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
