जिला अस्पताल में मरीज की मौत के बाद 2 घंटे तक हंगामा

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सोमवार की सुबह जिला अस्पताल में उस वक्त तनाव और आक्रोश का माहौल छा गया, जब एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने दो घंटे से अधिक समय तक जमकर हंगामा किया। यह घटना अस्पताल की लचर व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

मिली जानकारी के अनुसार, शिवपुर गांव के 45 वर्षीय रामेश्वर प्रसाद को रविवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। उनके परिजनों का कहना है कि भर्ती के बाद रामेश्वर की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, और उन्होंने कई बार ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ से गुहार लगाई कि रामेश्वर को ठीक से देखा जाए या किसी बड़े डॉक्टर को बुलाया जाए। लेकिन कथित तौर पर उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।

सुबह लगभग 6 बजे रामेश्वर ने डॉक्टरों की अनदेखी के बीच ही दम तोड़ दिया। यह खबर सुनते ही परिजनों का सब्र जवाब दे गया। रामेश्वर की पत्नी, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य वहीं फूट-फूट कर रोने लगे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने अस्पताल परिसर में “डॉक्टर मुर्दाबाद” और “हमें न्याय चाहिए” जैसे नारे लगाने शुरू कर दिए। उनका सीधा आरोप था कि यदि समय पर उचित इलाज मिलता, तो रामेश्वर की जान बचाई जा सकती थी।

इस दौरान इमरजेंसी वार्ड के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के परिजन भी इस घटना से सहम गए और अपनी व्यवस्थाओं को लेकर चिंतित दिखे। अस्पताल के सुरक्षाकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहे। परिजनों का गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने किसी की बात सुनने से इनकार कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक यही स्थिति बनी रही।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिजन मृतक के शव को वहीं रखकर प्रदर्शन करते रहे और लिखित में जांच की मांग पर अड़े रहे। अंततः पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को शांत कराया और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही करीब दो घंटे बाद हंगामा शांत हो सका और रामेश्वर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं और डॉक्टरों की जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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