काशी में गूंजा हनुमत जयघोष: महादेव की नगरी में मना अंजनी पुत्र का जन्मोत्सव

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काशी, जिसे भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, आज एक अलग ही भक्तिमय रंग में रंगी हुई थी। यहां महादेव के 11वें रुद्रावतार, संकटमोचन हनुमान जी के प्राकट्योत्सव का उल्लास अपने चरम पर था। भोर होते ही, शहर का कण-कण ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के उद्घोष से गूंज उठा। ऐसा लग रहा था मानो स्वयं महादेव भी अपने प्रिय भक्त के जन्मोत्सव की खुशियों में शामिल हों।

गली-मोहल्लों से लेकर बड़े मंदिरों तक, हर जगह भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा था। भक्तों ने अपने घरों को पताकाओं और रंगोली से सजाया था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने केसरिया वस्त्र धारण कर इस पावन पर्व में अपनी आस्था प्रकट की। मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया था। सिंदूर चढ़ाया गया, चमेली का तेल अर्पित किया गया और लड्डुओं का भोग लगाया गया।

हनुमान मंदिरों में सुबह से ही लंबी कतारें लगने लगी थीं। घंटा-घड़ियाल की ध्वनि और शंखनाद से पूरा वातावरण पवित्र हो उठा था। भक्तों ने सुंदरकांड का पाठ किया, हनुमान चालीसा का सस्वर गायन किया और बजरंग बाण का जाप कर अपनी मनोकामनाएं प्रभु के चरणों में अर्पित कीं। प्रसाद वितरण का क्रम दिन भर चलता रहा, जहां हर कोई भक्तिभाव से अंजनी पुत्र के जन्मोत्सव की खुशियां बांट रहा था।

चारों ओर लहराती भगवा हनुमान पताकाएं जैसे आसमानी लहरों पर तैर रही थीं, जो दूर से ही इस उत्सव की भव्यता का परिचय दे रही थीं। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और भक्ति का एक महाकुंभ था, जिसने काशी के हर निवासी को हनुमान जी की कृपा से सराबोर कर दिया। हर मुख पर हनुमान जी का नाम और हर हृदय में उनकी छवि विराजमान थी। यह दिन न केवल भगवान शिव की नगरी में, बल्कि हर भक्त के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह भर गया।

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