आईएमएस बीएचयू निदेशक ने सुनी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की समस्याएँ: बेहतर कार्यक्षेत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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मंगलवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस बीएचयू) के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने संस्थान के प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट (जेआर1) डॉक्टरों के साथ एक विशेष बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य नए डॉक्टरों द्वारा अनुभव की जा रही समस्याओं और चुनौतियों को सीधे उनसे सुनना और समझना था। यह पहल संस्थान प्रशासन की ओर से अपने युवा चिकित्सकों के कल्याण और उनके लिए एक अनुकूल शैक्षणिक एवं कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर अक्सर अपने नए परिवेश, अत्यधिक कार्यभार, अकादमिक दबाव और नई जिम्मेदारियों के कारण कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हैं। अस्पताल के विभिन्न विभागों में मरीजों की देखभाल के साथ-साथ अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण के बीच संतुलन बनाना उनके लिए एक कठिन कार्य होता है। ऐसी स्थिति में, निदेशक द्वारा स्वयं उनसे बातचीत करना न केवल उन्हें प्रोत्साहित करता है बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि उनकी आवाज़ सुनी जाए।

बैठक के दौरान, जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को खुलकर साझा किया, जिनमें लंबी ड्यूटी के घंटे, पर्याप्त आराम का अभाव, छात्रावास सुविधाओं से संबंधित मुद्दे, अकादमिक संसाधनों की उपलब्धता और कभी-कभी वरिष्ठों के साथ तालमेल की चुनौतियां शामिल थीं। प्रो. संखवार ने सभी बिंदुओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि संस्थान प्रशासन इन समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उन्होंने बताया कि जूनियर रेजिडेंट चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, और उनकी भलाई सीधे तौर पर संस्थान की गुणवत्ता और मरीजों की देखभाल पर असर डालती है।

यह बैठक आईएमएस बीएचयू में एक ऐसे तंत्र के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जहाँ जूनियर डॉक्टरों को अपनी बात कहने और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक मंच मिलता है। निदेशक ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि डॉक्टरों की समस्याओं का समय पर निवारण किया जा सके और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया जा सके। इस प्रकार की पहल से न केवल कार्यस्थल का माहौल बेहतर होता है, बल्कि यह युवा चिकित्सकों में अपने संस्थान के प्रति अपनेपन और विश्वास की भावना भी पैदा करती है, जो अंततः गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होती है।

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