काशी में लौटी सिहरन: दो महीने बाद मौसम ने ली करवट
दो महीने के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार काशी में उस चिर-परिचित सिहरन की वापसी हुई है, जिसका इंतजार यहाँ के बाशिंदे बेसब्री से कर रहे थे। पिछले कई दिनों से चल रही उमस भरी गर्मी के बाद, मंगलवार की तड़के सुबह तेज हवाओं और हल्की-फुल्की बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल दिया। सुबह की पहली किरण फूटने से पहले ही, हवा में घुली नमी और बारिश की फुहारों ने वातावरण में एक सुखद ठंडक घोल दी।
सुबह-सुबह जब लोगों की आँख खुली, तो उन्हें कमरे के भीतर भी एक हल्की-सी सिहरन महसूस हुई। खिड़की से झाँकने पर बाहर का नजारा कुछ और ही कहानी कह रहा था। आसमान में काले बादलों का डेरा था और ठंडी हवाएँ अपने साथ बारिश की बूँदें लिए आ रही थीं। इस अचानक बदली करवट से पारा सीधे 20 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया, जिसने पिछले दो महीनों की गर्मी से त्रस्त लोगों को तत्काल राहत प्रदान की।
दिन चढ़ने के साथ ही यह खुशनुमा मौसम और भी अधिक सुहाना होता चला गया। सूर्य देवता ने बादलों के पीछे से झाँकने की कोशिश तो की, लेकिन उनकी तपिश बेअसर रही। दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से लगभग 9.5 डिग्री सेल्सियस नीचे आ गया, जिससे पूरे दिन एक हल्की गुलाबी ठंडक का अहसास बना रहा। घाटों पर, गलियों में और मंदिरों के प्रांगण में अचानक हुए इस मौसम परिवर्तन का एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। चाय की दुकानों पर गर्मागरम चाय की चुस्कियों का दौर फिर से शुरू हो गया और लोगों ने अपनी अलमारियों से हल्के गर्म कपड़े बाहर निकालने शुरू कर दिए।
यह बदलाव केवल तापमान में कमी नहीं लाया, बल्कि इसने काशी की दिनचर्या और उसके मिजाज में भी एक नई ताजगी भर दी। अब सुबह की सैर करने वाले लोग ठंडी हवा का आनंद ले रहे हैं, और शहर में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। ऐसा लग रहा है मानो प्रकृति ने काशी को एक नई सौगात दी हो, जिसने तपती गर्मी से राहत देकर वातावरण को फिर से जीवंत कर दिया है।
