न्याय की ओर पहला कदम: अशोक कोल की तहरीर
रेखा और उसके परिवार के लिए वह दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं था, जब उनके घर का चिराग बुझ गया। यह घटना इतनी हृदय विदारक थी कि पूरे गाँव में शोक की लहर दौड़ गई। रेखा के देवर, अशोक कोल, जो इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े थे, उन्होंने ही इस मामले में न्याय की पहली सीढ़ी चढ़ने का साहस दिखाया। उनकी आँखों में आँसू थे, लेकिन मन में अपने प्रियजन के लिए न्याय दिलाने की दृढ़ इच्छाशक्ति थी।
जिस घटना ने उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया था, वह नागेंद्र नामक व्यक्ति के क्रूर कृत्य का परिणाम थी। नागेंद्र ने जो किया था, उसकी कल्पना करना भी भयावह था। इस अमानवीय कृत्य ने न केवल एक जीवन छीन लिया था, बल्कि रेखा और अशोक जैसे कई लोगों के दिलों में गहरा घाव छोड़ दिया था। परिवार में मातम पसरा था, हर कोई सदमे में था। रेखा तो जैसे पत्थर की मूरत बन गई थी, उसकी आँखों से आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
ऐसे विकट समय में, अशोक कोल ने अपनी भावनाओं को काबू में रखते हुए, कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया। उन्हें पता था कि उनके प्रियजन को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन कम से कम अपराधी को उसके किए की सज़ा मिलनी ही चाहिए। उन्होंने हिम्मत जुटाई और स्थानीय पुलिस थाने पहुँचे। उनका हाथ काँप रहा था, लेकिन इरादे मज़बूत थे। उन्होंने पुलिस को पूरी घटना विस्तार से बताई, हर उस बात का ज़िक्र किया जिससे आरोपी नागेंद्र के खिलाफ ठोस सबूत मिल सकें।
अशोक की तहरीर (शिकायत) पर कार्रवाई करते हुए, पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा। पुलिस अधिकारियों ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और सभी आवश्यक कागज़ी कार्रवाई पूरी की। तत्पश्चात, हत्या के आरोपी नागेंद्र के खिलाफ तत्काल प्रभाव से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई। यह कदम न्याय की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम था। पुलिस ने अशोक को भरोसा दिलाया कि वे इस मामले की गहनता से जाँच करेंगे और जल्द ही आरोपी को सलाखों के पीछे पहुँचाएँगे। परिवार और गाँव के लोगों को अब उम्मीद की एक किरण दिखी थी कि न्याय अवश्य मिलेगा। यह FIR सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई का आगाज़ था।
