स्काउट गाइड: एक गतिविधि नहीं, जीवन जीने का सलीका – प्रो. रमाकांत

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”'”स्काउट गाइड केवल एक गतिविधि नहीं, यह जीवन जीने का सलीका है,” प्रोफेसर रमाकांत का यह कथन अपने आप में गहरा अर्थ समेटे हुए है। यह सिर्फ वर्दी पहनने या शिविरों में जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मार्ग है जो व्यक्ति को बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। बचपन से ही बच्चों में अनुशासन, सेवा भावना और आत्मनिर्भरता के गुण रोपित करना ही स्काउट गाइड का मूल उद्देश्य है।

जब कोई बच्चा स्काउट या गाइड बनता है, तो वह केवल नए दोस्त नहीं बनाता, बल्कि वह एक ऐसे परिवार का हिस्सा बन जाता है जहाँ उसे प्रकृति के करीब रहना सिखाया जाता है, चुनौतियों का सामना करना सिखाया जाता है और दूसरों की मदद करने का महत्व समझाया जाता है। फर्स्ट एड से लेकर प्राथमिक उपचार तक, शिविर लगाने से लेकर जंगल में रास्ता खोजने तक, ये सभी कौशल सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकताओं से निपटने के व्यावहारिक तरीके हैं।

यह हमें सिखाता है कि कैसे छोटे-छोटे समूहों में मिलकर काम किया जाए, कैसे नेतृत्व किया जाए और कैसे दूसरों के प्रति संवेदनशीलता रखी जाए। प्रो. रमाकांत ने सही ही कहा है, यह एक ऐसा अनुभव है जो व्यक्तित्व को गढ़ता है। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखना सिखाता है और सबसे महत्वपूर्ण, हमें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराता है। यह सिर्फ स्कूलों में आयोजित होने वाला एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो ईमानदारी, साहस और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों पर आधारित है। यही कारण है कि स्काउट गाइड से जुड़े लोग जीवन भर इन सिद्धांतों पर चलते हैं और एक सार्थक जीवन जीते हैं।”’

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