शहर पर भीषण गर्मी का कहर: 24 घंटे में 2 डिग्री तापमान बढ़ा
शहर में सूरज का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा था। पिछले 24 घंटों में तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि ने लोगों को हिलाकर रख दिया था। आसमान से आग बरस रही थी, मानो सूरज देवता अपनी पूरी शक्ति से धरती को झुलसाने पर उतारू हों। दोपहर होते-होते सड़कें तवे की तरह गरम हो जाती थीं, जिन पर चलना भी दूभर हो जाता था। हवा में नमी का नामोनिशान नहीं था, सिर्फ गर्म लू के थपेड़े शरीर को झुलसा रहे थे।
घरों के अंदर भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही थी। पंखे और कूलर मानो सिर्फ गर्म हवा को एक कोने से दूसरे कोने तक धकेल रहे थे। बिजली कटौती ने इस भीषण गर्मी को और भी असहनीय बना दिया था। लोग अपने घरों में दुबके रहने को मजबूर थे, क्योंकि बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं था। बच्चों के खेल के मैदान खाली पड़े थे और गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था।
बाजारों में भी भीड़ कम हो गई थी। जो लोग आवश्यक काम से बाहर निकलते थे, वे भी जल्दी से अपना काम निपटाकर छायादार जगहों की तलाश करते थे। नींबू पानी, गन्ने का रस और ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर थोड़ी बहुत रौनक दिखती थी। लोग अपने चेहरों को कपड़े से ढके हुए, धूप से बचने की हर संभव कोशिश कर रहे थे।
गर्मी का यह आलम न सिर्फ इंसानों पर बल्कि पशु-पक्षियों पर भी भारी पड़ रहा था। पेड़ों की छांव में बेजुबान जानवर हांफते हुए दिख रहे थे। पानी के स्रोत सूखने लगे थे, जिससे जल संकट की आशंका भी बढ़ रही थी। इस बढ़ती गर्मी ने पूरे शहर के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। हर कोई बस एक ही प्रार्थना कर रहा था कि कब इंद्र देवता मेहरबान होंगे और बारिश की बूंदें इस तपती धरती को ठंडक पहुंचाएंगी।
