देर रात का साड़ी शूट और अतुल का बयान

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रात के करीब ग्यारह बज चुके थे। श्याम बाजार की चहल-पहल अब पूरी तरह से थम चुकी थी और दुकानों के शटर गिर चुके थे। सिर्फ बृजेश अग्रवाल की पुरानी, ​​लेकिन भव्य बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर रोशनी चमक रही थी। यहीं, एक नामी साड़ी ब्रांड के लिए विज्ञापन की शूटिंग चल रही थी। अतुल, जो इस प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, पिछले कई घंटों से अथक परिश्रम कर रहा था। डिजाइनर साड़ियों की चमक, मॉडल्स के बदलते पोज और निर्देशक के लगातार निर्देशों के बीच समय का पता ही नहीं चला था।

आखिरकार, निर्देशक ने ‘कट’ कहा और ऐलान किया कि आज के लिए शूटिंग समाप्त हुई। अतुल ने गहरी सांस ली, थकान और राहत का मिलाजुला एहसास उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था। कैमरे, लाइट्स और अन्य उपकरण समेटने का काम शुरू हो चुका था, लेकिन अतुल सबसे पहले नीचे उतरना चाहता था। उसे घर जाकर आराम की सख्त जरूरत थी।

उसने लिफ्ट का इंतजार नहीं किया और सीढ़ियों से ही नीचे उतरना शुरू कर दिया। हर सीढ़ी के साथ दिनभर की थकावट और घर पहुँचने की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। बिल्डिंग की खामोशी रात के सन्नाटे को और गहरा कर रही थी। जब वह आखिरकार ग्राउंड फ्लोर पर पहुँचा, तो घड़ी में ठीक ग्यारह बज रहे थे। बाजार की सड़कें सुनसान थीं और सिर्फ कुछ आवारा कुत्ते ही दिखाई दे रहे थे। अतुल को नहीं पता था कि अगले ही पल उसके साथ क्या होने वाला है, और कुछ देर बाद उसे पुलिस को इस देर रात के काम के बारे में विस्तार से बताना होगा, जो सिर्फ एक विज्ञापन शूट की समाप्ति थी।

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