मोबाइल पर मगन युवक पर आकाशीय बिजली का कहर: झुलसा शरीर, परिवार में कोहराम

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एक सामान्य दोपहर थी, आसमान में हल्के-फुल्के बादल मंडरा रहे थे, लेकिन किसी ने सोचा नहीं था कि प्रकृति का रौद्र रूप इतनी जल्दी देखने को मिलेगा। जौनपुर जिले के मछलीशहर तहसील के एक छोटे से गाँव में, सूरज ढलने को था और लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी गाँव का रहने वाला, मोहन (एक काल्पनिक नाम), करीब 22-23 साल का एक नौजवान, अपने घर की ओर चला आ रहा था। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, और कानों में हेडफोन लगे थे, शायद वह कोई गाना सुन रहा था या किसी मित्र से बात कर रहा था। उसकी आँखें पूरी तरह से अपने मोबाइल स्क्रीन पर टिकी हुई थीं, जहाँ वह शायद कोई सोशल मीडिया फ़ीड देख रहा था या कोई वीडियो।

मौसम तेजी से बदल रहा था। पहले हल्की हवा चली, फिर बादलों की गड़गड़ाहट दूर से सुनाई देने लगी। आकाश में काले घने बादल छाने लगे थे, जो पल भर में दोपहर की रोशनी को साँझ में बदल रहे थे। गाँव के बड़े-बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि ऐसे मौसम में खुले में या पेड़ों के नीचे नहीं रहना चाहिए, लेकिन मोबाइल की दुनिया में डूबा मोहन शायद इस चेतावनी से बेखबर था। वह अपनी धुन में मगन, सड़क पर चला जा रहा था, उसे इस बात का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि अगले ही पल उसके साथ क्या होने वाला है।

अचानक! एक जोरदार कड़कड़ाहट के साथ बिजली चमकी और गिरी। यह इतनी तीव्र और अप्रत्याशित थी कि किसी को कुछ सोचने का मौका ही नहीं मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली सीधे मोहन के ऊपर गिरी। उसके शरीर से एक तेज़ चमक निकली और वह ज़मीन पर गिर पड़ा। उसके हाथ से मोबाइल छूट गया और वह कुछ पल के लिए अचेत हो गया। आस-पास के लोग, जो इस भयावह दृश्य के साक्षी बने, सन्न रह गए। कुछ पल की खामोशी के बाद गाँव में चीख-पुकार मच गई।

मोहन के परिवार वाले, जो घर पर ही थे, बिजली की कड़कड़ाहट सुनकर बाहर आए। जब उन्होंने मोहन को ज़मीन पर बेसुध पड़ा देखा, तो उनकी दुनिया ही थम गई। आनन-फानन में परिवार के सदस्य और कुछ पड़ोसी उसकी ओर दौड़े। मोहन का शरीर झुलस गया था और उसमें कोई हरकत नहीं थी। बिना समय गंवाए, उसे तुरंत उठाया गया और एक ऑटो-रिक्शा या किसी उपलब्ध वाहन में बिठाकर तत्काल इलाज के लिए मछलीशहर के अस्पताल की ओर ले जाया गया। रास्ते भर परिवार के लोग ईश्वर से उसकी सलामती की दुआ कर रहे थे। यह घटना गाँव में दहशत का माहौल पैदा कर गई और एक बार फिर प्रकृति की शक्ति के आगे इंसान की बेबसी को उजागर कर गई।

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