चाँद नज़र नहीं आया: अलविदा नमाज़ आज, ईद कल
अल्लाह के करम और रहमतों के साथ, हमें यह सूचित करना पड़ रहा है कि आज शाबान का चाँद नज़र नहीं आया है। इस खबर के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि रमज़ान का मुक़द्दस महीना पूरे तीस दिनों का होगा, और आज, शुक्रवार, रमज़ानुल मुबारक का आखिरी रोज़ा है। यह खबर जहाँ एक ओर रमज़ान के बाबरकत महीने के गुज़र जाने का एहसास दिलाती है, जिसकी बरकतों से हमने अपनी रूह को पाक किया, वहीं दूसरी ओर आने वाली खुशियों और ईद की चहल-पहल का भी पैगाम लिए हुए है।
आज, शुक्रवार को, मस्जिदों में अलविदा जुमा या जुम्मतुल विदा की विशेष नमाज़ें अदा की जाएँगी। यह रमज़ान का आखिरी जुमा होता है और इस्लामी रिवायत में इसकी बड़ी फ़ज़ीलत है। मुस्लिम भाईचारे के लोग इन दुआओं में शामिल होकर अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं, अपनी गलतियों के लिए तौबा करते हैं और आने वाले साल के लिए अमन-ओ-अमान, खुशहाली और तरक्की की दुआ करते हैं। यह मौका होता है अपने खालिक-ए-कायनात से करीब होने का, इबादत और शुक्रगुज़ारी का, और अपने दिली मुरादों को मांगने का।
इंशाअल्लाह, चाँद नज़र न आने की वजह से, ईद-उल-फित्र का मुक़द्दस त्योहार कल, शनिवार को पूरे उत्साह, अकीदत और रूहानियत के साथ मनाया जाएगा। ईद की तैयारियाँ घरों-घरों में ज़ोरों पर हैं। बच्चे, बड़े सभी नए कपड़ों की खरीदारी, स्वादिष्ट पकवानों, खासकर ज़ायकेदार सेवइयों और शीर खुरमा की तैयारी में लगे हुए हैं। ईद का दिन हमें आपसी मोहब्बत, भाईचारे और एक-दूसरे की खुशियों में शरीक होने का संदेश देता है। यह खुशी बाँटने, गिले-शिकवे भुलाने और ज़रूरतमंदों की मदद करने का दिन है। यह त्योहार हमें एकता और सद्भाव का पाठ पढ़ाता है।
इस मुबारक मौके पर, मैं आप सभी को ईद-उल-फित्र की दिली मुबारकबाद पेश करता हूँ। अल्लाह ताला हम सबकी दुआओं, इबादतों और नेक कामों को कुबूल फरमाए और हमारे मुल्क में अमन-ओ-चैन, खुशहाली और बरकत बनाए रखे। ईद मुबारक!
