पुल से कूदी युवती को मल्लाहों ने दिया नया जीवन
एक शांत दोपहर थी। सूरज की किरणें नदी के पानी पर सुनहरी चादर बिछा रही थीं। पुल पर सन्नाटा था। तभी एक युवती अपनी साइकिल लिए वहां रुकी। उसके चेहरे पर उदासी की गहरी छाया थी। उसने साइकिल एक किनारे लगाई और बिना किसी पल की देर किए, पुल की मुंडेर पर चढ़ गई।
नीचे नदी अपनी शांति से बह रही थी। युवती ने एक गहरी सांस ली और अगले ही पल, उसने खुद को उस अथाह जलधारा के हवाले कर दिया। एक जोरदार छपाक की आवाज हुई, जिसने पुल के सन्नाटे को तोड़ दिया।
नदी में कुछ दूरी पर अपनी नावों में बैठे मल्लाहों ने यह दृश्य देखा। उनकी अनुभवी आँखें तुरंत समझ गईं कि कुछ अनहोनी हुई है। बिना एक पल गंवाए, उनमें से एक फुर्तीला मल्लाह, रामू अपनी नाव को उस दिशा में दौड़ा ले गया, जिधर युवती गिरी थी। उसके साथी भी पीछे हो लिए।
रामू ने देखा कि युवती पानी में संघर्ष कर रही थी, पानी का तेज बहाव उसे दूर बहाए ले जा रहा था। रामू ने पूरी ताकत से अपनी पतवार चलाई और कुछ ही पलों में वह युवती के पास पहुँच गया। उसने तुरंत अपना मजबूत हाथ बढ़ाया और युवती को कसकर पकड़ लिया। उसके साथियों ने भी मदद की और सावधानी से युवती को नाव में खींच लिया गया।
युवती पूरी तरह से भीगी हुई थी और डर के मारे कांप रही थी। मल्लाहों ने उसे शांत कराया, पानी पिलाया और उसके जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने उसे किनारे तक पहुँचाया और पुलिस को सूचित किया। मल्लाहों की तत्परता और बहादुरी ने एक अनमोल जान बचा ली थी। यह घटना शहर में चर्चा का विषय बन गई, और उन बहादुर मल्लाहों की खूब सराहना हुई, जिन्होंने एक डूबती हुई जिंदगी को नया जीवन दिया।
