जल जीवन मिशन: काकराद में पानी की किल्लत
जल जीवन मिशन, जिसका उद्देश्य देश के हर घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाना है, काकराद की कई बस्तियों में अभी भी एक अधूरा सपना है। सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना, जो ग्रामीण भारत में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए शुरू की गई थी, काकराद में अपने लक्ष्यों को पूरा करती नहीं दिख रही है, जिससे स्थानीय निवासियों में निराशा है।
काकराद के लोगों ने इस मिशन से बहुत उम्मीदें पाल रखी थीं। उन्हें लगा था कि अब उन्हें और उनकी महिलाओं को पानी लाने के लिए दूर-दराज के इलाकों में भटकना नहीं पड़ेगा। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार आने की भी आशा थी। विशेषकर उन परिवारों के लिए, जहाँ पानी की कमी रोजमर्रा की सबसे बड़ी चुनौती है, यह एक बड़ी राहत साबित होनी थी।
दुर्भाग्यवश, काकराद की कई बस्तियों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। नल तो लगाए गए हैं, और कहीं-कहीं पाइपलाइन भी बिछाई गई है, लेकिन उनमें पानी नहीं आता। कई जगहों पर या तो काम अधूरा छोड़ दिया गया है, या फिर जो थोड़ा-बहुत काम हुआ भी है, वह गुणवत्ताहीन है। टूटी हुई पाइपलाइनें और लीकेज आम बात है, जिससे पानी बर्बाद होता है और आपूर्ति बाधित होती है। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने बार-बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है, लेकिन उनकी शिकायतें अनसुनी रह जाती हैं।
गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है, जब भूजल स्तर नीचे चला जाता है और हैंडपंप सूखने लगते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को तालाबों या कुओं के दूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि उन्हें पानी लाने में घंटों खर्च करने पड़ते हैं।
यह गंभीर चिंता का विषय है कि जब देश के अधिकांश हिस्सों में जल जीवन मिशन की सफलता की गाथाएं लिखी जा रही हैं, तब काकराद जैसे इलाकों में लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर वास्तविकता का आकलन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि काकराद की हर बस्ती तक शुद्ध और पर्याप्त पानी पहुंचे, ताकि इस महत्वपूर्ण योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और जल्द ही उन्हें भी ‘हर घर जल’ का लाभ मिल पाएगा।
