मुस्लिम महिलाओं ने गुलाल लगाकर दिया शांति का पैगाम
यह दृश्य सचमुच मनमोहक और प्रेरणादायक था। जहां देश के कई हिस्सों में धार्मिक सौहार्द को चुनौती मिल रही है, वहीं एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने शांति और एकता का संदेश दिया। मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने सांप्रदायिक सद्भाव की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए एक अनोखे अंदाज में होली मनाई। उन्होंने न केवल एक-दूसरे को गुलाल लगाया, बल्कि समाज को यह पैगाम भी दिया कि धर्मों की दीवारें दिलों को बांट नहीं सकतीं।
इस आयोजन में हर उम्र की मुस्लिम महिलाएं शामिल थीं, जिनके चेहरों पर खुशी और अपनेपन का भाव स्पष्ट दिख रहा था। रंग-बिरंगे गुलाल से सने उनके हाथ और हंसते हुए चेहरे यह बता रहे थे कि प्रेम और भाईचारा ही जीवन का असली रंग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्यौहार किसी एक धर्म या समुदाय की बपौती नहीं होते, बल्कि वे सभी को एकजुट करने का माध्यम होते हैं। यह परंपरा, यह संस्कृति हमें एक-दूसरे के करीब लाती है।
इन महिलाओं ने अपने इस कार्य से रूढ़िवादी सोच को चुनौती दी और एक प्रगतिशील भारत की तस्वीर पेश की। उन्होंने दिखाया कि धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। गुलाल के रंगों में रंगी ये महिलाएं सिर्फ होली नहीं खेल रही थीं, बल्कि वे सदियों पुराने उस ताने-बाने को मजबूत कर रही थीं, जिसमें भारत की आत्मा बसती है – अनेकता में एकता। उनके इस कदम ने यह साबित कर दिया कि जब महिलाएं आगे आती हैं, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव की सबसे बड़ी वाहक बनती हैं। यह सिर्फ एक त्यौहार नहीं था, यह एक संकल्प था – शांति का, सौहार्द का, और प्रेम का। यह संदेश दूर-दूर तक जाएगा और लोगों को प्रेरित करेगा कि वे एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान करें और सद्भाव के साथ रहें।
