रंगभरी एकादशी: बाबा विश्वनाथ के साथ केवल 64 लोगों को मिलेगा मंदिर में प्रवेश
काशी में रंगभरी एकादशी का त्योहार एक विशेष उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पावन पर्व होली से ठीक पहले आता है और इसे “छोटी होली” के रूप में भी जाना जाता है, जब शिव भक्त रंगों और गुलाल से सराबोर होकर भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम का उत्सव मनाते हैं। इस दिन की रौनक पूरे काशी विश्वनाथ धाम में देखते ही बनती है, जब भक्तगण बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती की एक झलक पाने को आतुर रहते हैं।
रंगभरी एकादशी का मुख्य आकर्षण बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती की विशेष पालकी यात्रा होती है। यह यात्रा मंदिर परिसर से निकलकर नगर भ्रमण करती है, जिसमें हजारों भक्तगण “हर हर महादेव” के जयकारे लगाते हुए झूमते-गाते चलते हैं। चारों ओर उड़ता गुलाल और भक्तिमय वातावरण काशी की अलौकिक छटा को और बढ़ा देता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें भगवान शिव के गौना उत्सव का भी चित्रण होता है, जब वे माता पार्वती को अपने धाम लेकर आते हैं।
हालांकि, इस वर्ष भी रंगभरी एकादशी के इस दिव्य अवसर पर एक विशेष नियम का पालन किया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि बाबा विश्वनाथ की पालकी के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति केवल 64 लोगों को ही होगी। यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था और सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है, ताकि परंपराओं का निर्वहन शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। यह नियम भीड़ को नियंत्रित करने और सभी भक्तों के लिए व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होता है। यह सीमित संख्या मंदिर की प्राचीन गरिमा और परंपराओं के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। काशी की यह अनूठी परंपरा भक्तों को आध्यात्मिक आनंद और शांति प्रदान करती है।
