वन टाइम टैक्स के विरोध में कैब-टैक्सी चालकों का प्रदर्शन: 200 संचालकों ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

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शहर में वन टाइम टैक्स के विरोध में कैब और टैक्सी संचालकों का गुस्सा आज सड़कों पर फूट पड़ा। लगभग 200 कैब और टैक्सी चालकों ने शहर के प्रमुख चौक पर एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके चलते कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि सरकार द्वारा लगाया गया यह नया वन टाइम टैक्स उनके पहले से ही संघर्षपूर्ण जीवन को और भी मुश्किल बना देगा, जिससे उनके परिवारों का गुजारा करना भी कठिन हो जाएगा।

सुबह से ही कैब और टैक्सी चालक अपने वाहनों के साथ प्रदर्शन स्थल पर जुटने लगे थे। उनके हाथों में “वन टाइम टैक्स वापस लो!”, “हमारा रोजगार मत छीनो!” और “सरकार होश में आओ!” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं। उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को पूरा करने की पुरजोर अपील की। टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें, वाहनों के रखरखाव का भारी खर्च और अब यह नया वन टाइम टैक्स उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से चौपट कर देगा। उन्होंने कहा, “हमारा व्यवसाय पहले ही मंदी की मार झेल रहा है। कोरोना काल के बाद से व्यापार अभी तक पटरी पर नहीं आया है। ऐसे में एक और भारी-भरकम कर थोपना सरासर अन्याय है। सरकार को हम जैसे छोटे व्यवसायियों के बारे में सोचना चाहिए।”

प्रदर्शन में शामिल कई चालकों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे रोज कमा कर अपना घर चलाते हैं। अगर उनकी आय पर ऐसे ही टैक्स का बोझ बढ़ता रहा, तो उनके बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना नामुमकिन हो जाएगा। एक महिला कैब चालक, जिनका नाम सुनीता देवी है, ने भावुक होकर कहा, “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, ताकि हमारे परिवार दो वक्त की रोटी खा सकें। यदि यह टैक्स वापस नहीं लिया गया, तो हम सभी चालकों को मजबूरन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ेगा।”

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें सरकार से तत्काल इस वन टाइम टैक्स को वापस लेने की मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ेंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होगी। इस प्रदर्शन से शहर में कुछ देर के लिए कैब और टैक्सी सेवाओं पर असर पड़ा, लेकिन चालकों का कहना है कि यह उनकी मजबूरी है और वे अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं को समझेगी और जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकालेगी।

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