ईएसआईसी अस्पताल में चार दिन से लिफ्ट खराब, मरीजों की बढ़ी परेशानी; मानवीय पहलू पर भी असर

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ईएसआईसी अस्पताल, जो लाखों श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, इन दिनों एक बड़ी समस्या से जूझ रहा है। पिछले चार दिनों से अस्पताल की मुख्य लिफ्ट खराब पड़ी है, जिसके कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को असहनीय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि उन सैकड़ों लोगों के लिए एक मानवीय संकट बन गई है, जिन्हें हर दिन इलाज के लिए ऊपरी मंजिलों पर जाना पड़ता है।

अस्पताल की कई महत्वपूर्ण इकाइयां, जैसे कि ऑपरेशन थिएटर, विभिन्न विशेषज्ञता के ओपीडी, डायग्नोस्टिक लैब और वार्ड, ऊपरी मंजिलों पर स्थित हैं। ऐसे में, बुजुर्ग मरीज, गर्भवती महिलाएं, शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति, और वे मरीज जिन्हें स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर ले जाना पड़ता है, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कल्पना कीजिए, एक गंभीर हृदय रोगी या दुर्घटना का शिकार हुआ व्यक्ति, जिसे तत्काल इलाज की आवश्यकता है, उसे लिफ्ट की अनुपस्थिति में सीढ़ियों से ले जाया जा रहा हो। यह न केवल मरीज की स्थिति को और बिगाड़ सकता है, बल्कि उनके तीमारदारों के लिए भी एक अत्यधिक शारीरिक और मानसिक बोझ बन जाता है।

एक महिला, जो अपनी नवजात बेटी के साथ तीसरी मंजिल पर बाल रोग विभाग जा रही थी, ने नम आँखों से बताया, “मेरी बच्ची को बुखार है और उसे गोद में लेकर सीढ़ियां चढ़ना बहुत मुश्किल हो रहा है। पहले ही अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, ऊपर से यह परेशानी।” ऐसे ही एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें हर हफ्ते फिजियोथेरेपी के लिए दूसरी मंजिल पर जाना पड़ता है, और लिफ्ट खराब होने से उन्हें यात्रा ही छोड़नी पड़ रही है, जिससे उनके उपचार में बाधा आ रही है।

यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है। चार दिनों तक एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक अस्पताल में लिफ्ट का खराब रहना और उसे ठीक न करना, यह दर्शाता है कि मरीजों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। ईएसआईसी अस्पतालों का उद्देश्य ही सस्ते और सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है, लेकिन ऐसी मूलभूत सुविधा के अभाव में यह उद्देश्य अधूरा ही रह जाता है।

मरीजों और उनके परिजनों ने एकजुट होकर प्रशासन से तत्काल इस समस्या का समाधान करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि लिफ्ट को अविलंब ठीक कराया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए। यह केवल एक लिफ्ट का सवाल नहीं है, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और अस्पताल की कार्यप्रणाली का भी सवाल है। उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द से जल्द इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे।

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