होली से पहले 19 साल बाद महा चंद्रग्रहण: सूतक काल 9 घंटे पहले, मंदिरों के कपाट बंद, जानें प्रभाव
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा एक ऐसी खगोलीय घटना लेकर आ रही है, जो हर 19 साल में एक बार होती है। जी हाँ, होली से ठीक पहले एक दुर्लभ चंद्रग्रहण पड़ने जा रहा है। यह महा चंद्रग्रहण सिंह राशि में लगेगा, जिसका ज्योतिषीय जगत में विशेष महत्व है। भारतीय ज्योतिष गणना के अनुसार, यह संयोग 19 वर्षों के अंतराल पर बन रहा है, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।
ग्रहण के दौरान ‘सूतक काल’ का विशेष महत्व होता है। यह एक ऐसा समय है जब प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक माना जाता है। इस बार चंद्रग्रहण का सूतक इसके लगने से ठीक 9 घंटे पहले ही प्रारंभ हो जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इस अवधि में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और अन्य शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण काल में कई सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर न निकलने, भोजन न करने, धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करने और ईष्टदेव का स्मरण करने की सलाह दी जाती है। बच्चों और वृद्धों को भी इस दौरान विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदी में स्नान करने या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करने का विधान है। इसके बाद दान-पुण्य करने से ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
चूंकि यह ग्रहण होली से ठीक पहले पड़ रहा है, इसलिए होलिका दहन और होली के पर्व पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में ही संपन्न होता है और ग्रहण उसके बाद ही लगेगा, लेकिन इस दुर्लभ खगोलीय घटना के कारण लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। 19 साल बाद इस प्रकार का चंद्रग्रहण आना ज्योतिष और धर्म दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान सभी को संयम और धार्मिक नियमों का पालन करते हुए इस अद्भुत खगोलीय नजारे का साक्षी बनना चाहिए।
