संकटमोचन मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
वाराणसी के पावन घाटों से कुछ दूर स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर, अपनी अलौकिक शांति और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। मंगलवार और शनिवार के दिन तो यहाँ भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है, लेकिन इन दिनों जब विशेष पर्व या त्यौहार होते हैं, तो मंदिर परिसर में तिल धरने की भी जगह नहीं मिलती। दूर-दराज से आए श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, बस एक झलक पाने के लिए बजरंगबली की।
सुबह की पहली किरण फूटते ही मंदिर के पट खुलते हैं और तभी से “जय श्री राम” और “जय हनुमान” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंजने लगता है। धूप, दीप और चंदन की सुगंध हवा में घुल जाती है, जो एक दिव्य और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है। बच्चे, बूढ़े, जवान, स्त्री और पुरुष – सभी अपनी-अपनी मनोकामनाएं लेकर मंदिर पहुंचते हैं। कोई नौकरी के लिए प्रार्थना करता है, तो कोई परिवार की सुख-शांति के लिए, और कोई स्वास्थ्य लाभ की कामना से।
भक्तों की श्रद्धा देखते ही बनती है। हाथों में फूल-माला, प्रसाद और सिंदूर लिए, वे धैर्यपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हैं। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते श्रद्धालुओं की मधुर ध्वनि कानों में पड़ती है, जो मन को असीम शांति प्रदान करती है। पुजारी विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।
संकटमोचन मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है, जहाँ आकर उन्हें अपने दुखों से मुक्ति और नई ऊर्जा मिलती है। यहाँ का वातावरण इतना सकारात्मक और ऊर्जावान होता है कि हर कोई एक नई स्फूर्ति और आशा के साथ घर लौटता है। यह मंदिर वास्तव में भक्तों के लिए एक ऐसा आश्रय स्थल है, जहाँ हर संकट का मोचन होता है। यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव है जो हर भक्त को अपनी ओर खींचता है।
