शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा सनातनी पंचांग का विमोचन: नव संवत्सरोत्सव पर एक महत्वपूर्ण पहल

0

चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा तिथि का अपना एक विशेष महत्व है, जो भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में नव वर्ष के आगमन का प्रतीक है। यह वह पावन दिवस होता है जब प्रकृति एक नए चक्र का आरंभ करती है और संपूर्ण वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी शुभ अवसर पर, परम पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने बृहस्पतिवार को ‘नव संवत्सरोत्सव’ के भव्य आयोजन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य को सम्पन्न किया। उन्होंने विधिवत रूप से सनातनी पंचांग का विमोचन किया, जो सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए आने वाले वर्ष भर एक विश्वसनीय दिशासूचक का कार्य करेगा।

यह पंचांग केवल तिथियों, नक्षत्रों और मुहूर्तों का संकलन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी सहस्राब्दियों पुरानी ज्योतिषीय परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। शंकराचार्य जी महाराज ने इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पंचांग हमारे पर्वों, त्योहारों, व्रत-उपवासों और सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शक होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक समय में, जब विभिन्न मतों और स्रोतों से अनेक प्रकार के पंचांग उपलब्ध हैं, तब एक शुद्ध, प्रामाणिक और त्रुटिहीन सनातनी पंचांग की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है, ताकि हमारी परंपराओं का निर्वहन सही और शास्त्रसम्मत ढंग से हो सके।

इस गरिमामयी विमोचन समारोह में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, वेद-वेदांग के ज्ञाता विद्वान और विभिन्न क्षेत्रों से आए धर्मप्रेमी जनता उपस्थित थी। सभी ने एक स्वर में इस पुनीत पहल की सराहना की और इसे सनातन धर्म के संरक्षण, संवर्धन और उसकी प्रामाणिकता को बनाए रखने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया। शंकराचार्य जी ने अपने उद्बोधन में जोर देकर कहा कि हमें अपनी गौरवशाली जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और अपने धर्मग्रंथों एवं पारंपरिक ज्ञान का सदैव सम्मान करना चाहिए। यह नवनिर्मित पंचांग न केवल आगामी वर्ष के समस्त धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञों और आयोजनों की सटीक जानकारी प्रदान करेगा, बल्कि यह हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कालगणना के विज्ञान से भी गहराई से जोड़े रखेगा। नव संवत्सर का यह आगमन और सनातनी पंचांग का यह विमोचन, समाज में एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है, जिससे धार्मिक चेतना और सामाजिक एकजुटता और भी अधिक प्रबल होगी। यह पंचांग वास्तव में सनातन धर्म की वैज्ञानिकता और उसकी कालजयी परंपरा का एक अद्भुत और जीवंत प्रमाण है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *