वाराणसी में स्ट्रीट फ़ूड वेंडर्स की दुर्दशा: सिलेंडर की कमी से थमा कारोबार

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वाराणसी, जिसे अक्सर मंदिरों और घाटों का शहर कहा जाता है, अपनी जीवंत गलियों और वहाँ मिलने वाले स्वादिष्ट स्ट्रीट फ़ूड के लिए भी प्रसिद्ध है। लेकिन हाल के दिनों में इस शहर की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है, जो कई लोगों के चेहरों से मुस्कान छीन रही है। रविंद्रपुरी, अस्सी, लंका, कबीरनगर और गोदौलिया जैसे चहल-पहल वाले इलाकों में, जहाँ शाम होते ही खाने-पीने की दुकानों पर रौनक आ जाती थी, अब सन्नाटा पसरा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने अपना काम बंद कर दिया है, और इसका मुख्य कारण है गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता।

ये सिर्फ आँकड़े नहीं हैं, बल्कि हज़ारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल है। अस्सी घाट पर अपनी छोटी सी मैगी-चाय की दुकान चलाने वाले प्रभु साहनी की पीड़ा उनके शब्दों में साफ झलकती है। उन्होंने बताया, “हमारे पास गैस सिलेंडर नहीं है। सुबह से शाम तक मेहनत करके जो दो पैसे कमाते थे, अब वो भी बंद हो गया है। घर कैसे चलाएँ, बच्चों को क्या खिलाएँ?” प्रभु साहनी जैसे अनगिनत छोटे विक्रेता हैं, जिनकी जिंदगी का आधार यही छोटा सा ठेला या दुकान है। चाय की गरमाहट हो या मोमोज़ का तीखा स्वाद, बनारस की पहचान में इन स्ट्रीट फूड वेंडर्स का बड़ा योगदान है।

सिलेंडर न मिलने के कारण, इन विक्रेताओं को मजबूरन अपने ठेले और दुकानों के शटर गिराने पड़े हैं। सोचिए, अस्सी घाट की वो शामें, जहाँ पर्यटक और स्थानीय लोग मैगी और चाय का लुत्फ़ उठाते थे, अब वहाँ उदासी छाई है। लंका और गोदौलिया की व्यस्त सड़कों पर भी अब वह चहल-पहल नहीं दिखती। यह सिर्फ वेंडर्स का नुकसान नहीं, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। एक तरफ जहाँ ये लोग अपनी दैनिक आय से वंचित हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी अपनी पसंदीदा चीज़ों के लिए तरसना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालना बेहद ज़रूरी है, ताकि इन मेहनती लोगों की जिंदगी की गाड़ी फिर से पटरी पर आ सके और बनारस की गलियों में फिर वही पुरानी रौनक लौट आए।

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