ललिता घाट पर 19 मार्च से फिर गूँजेगी गंगा आरती की मंगल ध्वनि

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वाराणसी की पावन धरा पर गंगा आरती का नज़ारा देखना हर किसी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होता है। गंगा मैया के तट पर संध्या के समय जब आकाश में सिंदूरी रंगत घुलती है और हजारों दीपों की लौ जगमगाती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वर्ग ही धरती पर उतर आया हो। मंत्रों की गूढ़ ध्वनि, घंटियों की खनक और शंखनाद का मधुर स्वर पूरे वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार करता है। इसी अद्भुत परंपरा को एक बार फिर जीवंत करते हुए, यह सूचित किया जाता है कि ऐतिहासिक ललिता घाट पर गंगा आरती का भव्य आयोजन पुनः 19 मार्च से नियमित रूप से शुरू होने जा रहा है।

ललिता घाट, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, अब एक बार फिर भक्ति और श्रद्धा के अलौकिक रंगों में रंगने को तैयार है। गंगा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह गंगा मैया के प्रति हमारी अटूट आस्था, कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने युगों-युगों से इस भूमि को जीवन प्रदान किया है। प्रत्येक संध्या को, प्रशिक्षित पुजारीगण अत्यंत समर्पण और भक्तिभाव के साथ माँ गंगा की स्तुति करते हैं, जिसमें दीपों की श्रृंखला, सुगंधित अगरबत्तियाँ, ताजे पुष्प और वेदों के मंत्रोच्चार का एक मनमोहक संगम देखने को मिलता है। इस दौरान घाट पर उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं का मन आध्यात्मिकता से भर उठता है और उन्हें एक अद्वितीय शांति व आनंद का अनुभव होता है।

वाराणसी आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे इस अलौकिक और पवित्र दृश्य के साक्षी बनें। 19 मार्च से प्रतिदिन संध्याकाल में आयोजित होने वाली यह आरती न केवल आँखों को सुकून प्रदान करेगी, बल्कि आत्मा को भी पवित्रता और नव ऊर्जा से परिपूर्ण करेगी। माँ गंगा, जो हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अविच्छिन्न जीवनधारा हैं, उनकी आरती में शामिल होकर हम सभी को इस प्राचीन और गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

तो आइए, इस अवसर पर आप भी सपरिवार 19 मार्च से प्रतिदिन ललिता घाट पर होने वाली इस भव्य गंगा आरती में शामिल हों और माँ गंगा के दिव्य आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य करें। यह सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि भक्ति के इस महाकुंभ में सहभागिता के लिए एक पावन निमंत्रण है।

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