भीषण गर्मी का कहर: हवाएं थमीं, पारा चढ़ा
आज की सुबह कुछ अलग ही संकेत लेकर आई थी। बीते कुछ दिनों से चल रही ठंडी हवाओं का दौर अब थम सा गया था। सुबह जब आंख खुली, तो खिड़की से आती धूप की तीखी किरणें बता रही थीं कि आज का दिन काफी गर्म रहने वाला है। धीरे-धीरे जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ता गया, उसकी तपिश और बढ़ती गई। सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम होती जा रही थी, मानो हर कोई इस बढ़ती गर्मी से बचने के लिए अपने घरों में दुबकना चाहता हो।
दोपहर होते-होते आलम यह था कि हवा की गति लगभग न के बराबर हो गई थी। जो थोड़ी-बहुत हवा चल भी रही थी, वह किसी लू के थपेड़ों से कम नहीं थी। पत्तों में सरसराहट नहीं थी, धूल के गुबार भी शांत पड़े थे, बस एक अजीब सी खामोशी चारों ओर पसरी हुई थी। आसमान बिल्कुल साफ था, कहीं कोई बादल का नामोनिशान नहीं। सूरज मानो आग बरसा रहा था। उसकी सीधी किरणें धरती को झुलसा रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया हो।
मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि तापमान में बढ़ोतरी होगी, लेकिन आज यह महसूस हो रहा था कि पारा वाकई अपने चरम पर पहुंच रहा है। पिछले दिन के मुकाबले आज पारे में 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, और यह एक डिग्री की बढ़ोतरी भी असहनीय लग रही थी। हर तरफ सिर्फ गर्मी, पसीना और उमस का साम्राज्य था। पानी की बोतलें पल भर में खाली हो जा रही थीं और कूलर-एसी भी इस भीषण गर्मी के आगे बेबस से लग रहे थे। यह सिर्फ शुरुआत थी, अभी तो गर्मी का लंबा दौर बाकी था, और यह सोचकर ही रूह कांप उठती थी। लोग शाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, इस उम्मीद में कि सूरज ढलने के बाद शायद थोड़ी राहत मिल सके।
