बीएचयू में छात्र पर जानलेवा हमला: फायरिंग, बिजली गुल और छात्रों का आक्रोश

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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) एक बार फिर अराजकता और तनाव का अखाड़ा बन गया। मंगलवार देर रात परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक छात्र पर जानलेवा हमला करते हुए चार राउंड फायरिंग की गई। यह सनसनीखेज घटना बीएचयू की लचर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने अपनी पहचान छिपाने और अपराध को अंजाम देने के लिए बेहद चालाकी से वारदात से ठीक पहले इलाके की बिजली काट दी। पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब गया और इसी का फायदा उठाकर उन्होंने छात्र को निशाना बनाया।

फायरिंग की ताबड़तोड़ आवाजें सुनकर आसपास के हॉस्टलों और रिहायशी इलाकों में दहशत फैल गई। छात्रों के बीच अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने कमरों से बाहर निकलकर देखने लगे कि क्या हुआ है। मौके पर पहुंची पुलिस को घटनास्थल से गोलियों के खाली कारतूस बरामद हुए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमलावरों के इरादे कितने खतरनाक और सीधे-सादे थे। इस वारदात के बाद छात्रों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। वे तत्काल इकट्ठा हो गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

गुस्साए छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, क्योंकि छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थे और प्रशासन से तत्काल जवाब मांग रहे थे। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस परिसर में पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने में पूरी तरह विफल रहे हैं, जिसके कारण आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए धरना प्रदर्शन किया। छात्रों ने हमलावरों की तुरंत गिरफ्तारी और विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की। यह घटना केवल एक छात्र पर हमला नहीं थी, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय समुदाय के विश्वास और सुरक्षा पर एक गहरा आघात थी। इस तरह की घटनाएं न केवल शैक्षणिक माहौल को दूषित करती हैं, बल्कि छात्रों के मन में असुरक्षा और भय का माहौल पैदा करती हैं। प्रशासन को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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