बीएचयू अस्पताल में स्वास्थ्य संकट: 12 दिन से जरूरी जांचें बंद, 100 से अधिक महिलाएं प्रभावित
बीएचयू अस्पताल, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, इन दिनों एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है। अस्पताल के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) विंग में पिछले 12 दिनों से एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी अत्यंत आवश्यक जांचें नहीं हो पा रही हैं। इस अप्रत्याशित बाधा ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, लगभग 100 से अधिक गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंद मरीजों को इन महत्वपूर्ण जांचों के लिए दूसरी जगहों पर भटकना पड़ा है। कल्पना कीजिए, एक गर्भवती महिला के लिए ऐसी स्थिति कितनी तनावपूर्ण हो सकती है, जब उसे अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जांचों के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल या निजी लैब में दौड़ना पड़े। इससे न सिर्फ उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।
एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी जांचें, विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान, बेहद महत्वपूर्ण होती हैं ताकि यदि कोई संक्रमण हो तो उसका समय पर पता चल सके और नवजात शिशु तक उसके प्रसार को रोका जा सके। इन जांचों में देरी या अनुपलब्धता मां और बच्चे दोनों के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से, जहां हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज और जांच के लिए आते हैं, ऐसी मूलभूत सुविधाओं की कमी अत्यंत निराशाजनक है।
यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर 12 दिनों से इतनी महत्वपूर्ण जांचें क्यों ठप पड़ी हैं? क्या यह प्रयोगशाला उपकरणों की खराबी, आवश्यक रिएजेंट्स की कमी, या फिर किसी प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है? अस्पताल प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और स्थिति को सामान्य करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। मरीजों को बेहतर, सुलभ और समय पर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना उनका अधिकार है। उम्मीद है कि जल्द ही यह समस्या दूर होगी और मरीजों को राहत मिलेगी।
