प्रधानमंत्री मोदी की ‘मन की बात’: डोमरी के पौधरोपण अभियान का विशेष उल्लेख
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण हुआ, जिसने एक बार फिर देश भर के लाखों लोगों को एक सूत्र में पिरो दिया। शहरों से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों तक, भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होकर इस मासिक संबोधन को सुना। यह केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से जुड़ी कहानियों, उपलब्धियों और प्रेरणाओं का एक संगम है, जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री सीधे जनता से संवाद स्थापित करते हैं और उन्हें देश के विविध पहलुओं से अवगत कराते हैं।
इस बार ‘मन की बात’ के 132वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने एक विशेष पहल का जिक्र किया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा – डोमरी में आयोजित वृहद पौधरोपण अभियान। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे इस अभियान के तहत हजारों की संख्या में पौधे लगाए गए, जिससे न केवल उस क्षेत्र की हरियाली बढ़ी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता भी पैदा हुई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे प्रयास न केवल हमारे पर्यावरण को शुद्ध करते हैं और जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि हमें प्रकृति के साथ गहरा संबंध बनाने और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए भी प्रेरित करते हैं। डोमरी के लोगों और इसमें शामिल स्वयंसेवकों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने दिखाया कि कैसे छोटे-छोटे स्थानीय प्रयास भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी प्रेरणा बन सकते हैं और सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन कर सकते हैं। यह अभियान दिखाता है कि जब समुदाय एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो वे कितने बड़े और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
इस जिक्र से यह संदेश स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री देश के हर उस प्रयास को महत्व देते हैं, जो समाज और राष्ट्र के हित में हो। ‘मन की बात’ का यह अंक एक बार फिर यह साबित करता है कि यह मंच केवल सरकारी नीतियों की घोषणा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जन-भागीदारी और सामूहिक प्रयासों को सराहनें और प्रोत्साहित करने का एक सशक्त जरिया है। ऐसे कार्यक्रमों से नागरिकों में राष्ट्र निर्माण की भावना प्रबल होती है और वे अपने आसपास सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे एक मजबूत और विकसित भारत का निर्माण संभव हो पाता है।
