दालमंडी में एक बार फिर गरजीं जेसीबी: अतिक्रमण हटाओ अभियान का दूसरा चरण शुरू, लोगों में हड़कंप
वाराणसी की प्राचीन और घनी आबादी वाली दालमंडी में एक बार फिर ध्वस्तीकरण का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पिछले दिनों चले अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद जब लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली थी, तब अचानक सोमवार की सुबह प्रशासन ने एक बार फिर अपने बुलडोजर के साथ दस्तक दी। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई शहर को सुव्यवस्थित करने और यातायात जाम की समस्या से निजात दिलाने के उद्देश्य से की जा रही है।
सुबह होते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और नगर निगम के कर्मचारी जेसीबी मशीनों के साथ दालमंडी क्षेत्र में पहुंच गए। चंद ही घंटों में, कई दशकों पुरानी दुकानों और मकानों के अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया गया। जिन दुकानदारों और निवासियों को पहले ही नोटिस मिल चुके थे, वे तो किसी तरह अपने सामान और यादों को सहेजने में लगे रहे, लेकिन कई ऐसे भी थे जो इस अचानक हुई कार्रवाई से स्तब्ध थे। अपनी आँखों के सामने अपनी रोजी-रोटी और आशियाना टूटते देखकर उनकी आँखों में बेबसी और आंसू साफ देखे जा सकते थे।
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने पर्याप्त समय और वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना यह कदम उठाया है। उनका कहना है कि दालमंडी सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि कई परिवारों की पीढ़ियों का ठिकाना है। वहीं, प्रशासन अपने फैसले पर अडिग है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार है और उन सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर हटाया जा रहा है जो सार्वजनिक मार्ग में बाधा बन रहे थे। प्रशासन का तर्क है कि शहर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए ऐसे कड़े फैसले लेना जरूरी है।
इस ध्वस्तीकरण अभियान का एक दिल दहला देने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जेसीबी मशीनों को भारी सुरक्षा के बीच निर्माणों को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में लोगों की भीड़, आक्रोश और पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी साफ दिख रही है, जो स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास कर रहे हैं। दालमंडी में यह तनावपूर्ण माहौल इस सवाल को खड़ा कर रहा है कि क्या शहर के विकास की कीमत आम आदमी के सपनों को कुचल कर चुकाई जाएगी? प्रभावित लोगों के पुनर्वास और न्याय की मांग तेज हो गई है।
