जांच रिपोर्ट में 15 दिन की देरी: अनिश्चितता और बेचैनी
पंद्रह दिन बीत चुके हैं, और उस महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। हर गुजरता दिन एक सदी सा लग रहा है। जब से डॉक्टर ने कुछ असामान्य लक्षणों के आधार पर यह जांच कराने की सलाह दी थी, मन में एक अजीब सी बेचैनी घर कर गई है। अस्पताल या पैथोलॉजी लैब से रिपोर्ट मिलने का समय 15 दिन बताया गया था, लेकिन आज 16वां दिन है और इंतज़ार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा।
हर सुबह आंख खुलने के साथ ही पहला विचार उसी रिपोर्ट का होता है। फ़ोन चेक करना, कहीं कोई मैसेज या कॉल तो नहीं आया? घर का दरवाज़ा बजते ही लगता है शायद डाकिया रिपोर्ट लेकर आया हो। यह अनिश्चितता अंदर ही अंदर खाए जा रही है। क्या रिपोर्ट में कुछ गंभीर होगा? क्या सब कुछ सामान्य होगा? इन सवालों के जवाब न मिलने तक चैन कहां?
परिवार के सदस्य भी परेशान हैं। वे मुझे दिलासा देने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनकी आंखों में भी वही चिंता साफ दिखती है। बार-बार लैब में फ़ोन करने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कभी कहते हैं ‘अभी प्रोसेस में है’, तो कभी ‘तकनीकी दिक्कत’ का बहाना। समझ नहीं आता कि इतनी देरी क्यों हो रही है, जबकि यह स्वास्थ्य से जुड़ा एक संवेदनशील मामला है।
इस देरी के कारण इलाज की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है। डॉक्टर ने कहा था कि रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अब जब रिपोर्ट ही नहीं है, तो न तो दवा शुरू हो पा रही है और न ही अगली सलाह मिल पा रही है। स्वास्थ्य विभाग को ऐसी देरी पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आम जनता के लिए समय पर रिपोर्ट मिलना कितना आवश्यक है, यह बात शायद वे भूल जाते हैं। यह केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं, बल्कि किसी के जीवन से जुड़ी उम्मीद और भय का प्रतीक है।
