काशी में डरावनी तूफानी रात: गरज और चमक से थर्राए लोग

0

बीती रात काशी के आसमान ने एक अलग ही रूप धारण कर लिया था। लगभग 10 मिलीमीटर बारिश हुई, लेकिन यह सिर्फ़ आँकड़ा नहीं था, बल्कि एक भयानक अनुभव था जिसने शहर को अपनी गिरफ़्त में ले लिया। जैसे ही सूरज ढला, हल्की फुहारों ने दस्तक दी, जो देखते ही देखते मूसलाधार बारिश में बदल गईं। बारिश की बूँदें छतों और खिड़कियों से टकराकर एक अनवरत शोर पैदा कर रही थीं, लेकिन असली खौफ तो बिजली की कड़कड़ाहट और बादलों की गर्जना से पैदा हुआ।

एक पल के लिए पूरा आसमान तेज़ सफ़ेद रोशनी से जगमगा उठता, और अगले ही पल कानों को चीर देने वाली गड़गड़ाहट से धरती काँप उठती। यह सिलसिला रात भर चलता रहा। काशी के निवासी अपने घरों में दुबके हुए थे, हर कड़कड़ाहट उनके दिल की धड़कनों को और तेज़ कर रही थी। बच्चे डर के मारे माँ-बाप से चिपक गए थे, और बड़े-बूढ़े आँखें मूंदकर किसी अनहोनी की आशंका से ग्रसित थे। कई लोगों की आँखों से तो रात भर नींद कोसों दूर रही। वे अपनी खिड़कियों से बाहर अंधेरे में चमकती बिजली और बारिश की तेज़ धार को निहारते रहे, हर पल यह सोचकर सहम उठते थे कि कहीं कोई पेड़ न गिर जाए, या किसी घर को नुकसान न पहुँचे।

बिजली के हर झटके के साथ, घरों के भीतर की परछाइयाँ अजीबोगरीब ढंग से नाचतीं, जिससे डर और भी गहरा होता जाता। यह सिर्फ बारिश नहीं थी, बल्कि प्रकृति का एक रौद्र रूप था जिसने काशी के शांत माहौल को पूरी तरह से बदल दिया था। लोगों के मन में अपने प्रियजनों की सुरक्षा और सुबह होने तक सब कुछ ठीक रहने की कामना घूम रही थी। 10 मिलीमीटर की बारिश ने सिर्फ ज़मीन को ही नहीं भिगोया था, बल्कि काशी के लोगों के दिलों में भी डर और चिंता का एक गहरा अहसास छोड़ दिया था। सुबह का इंतज़ार बेसब्री से किया जा रहा था, ताकि यह भयानक रात अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *