काशी के विद्वानों ने घोषित किए होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त
होली का त्योहार, रंगों और उमंग का महापर्व, हर साल एक नई ऊर्जा और खुशी लेकर आता है। इस बार भी फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन और उसके अगले दिन धुलेंडी की तैयारी पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ चल रही है। विशेषकर काशी, जो अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है, वहां के विद्वानों और पंचांग निर्माताओं की राय का विशेष महत्व होता है। हाल ही में, काशी के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्यों और धर्म विशेषज्ञों ने होलिका दहन और रंगों वाली होली के शुभ मुहूर्त को लेकर अपनी महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसने श्रद्धालुओं की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।
काशी के प्रकांड पंडितों और धर्मशास्त्रियों ने गहन विचार-विमर्श और शास्त्रों के अध्ययन के उपरांत यह निष्कर्ष निकाला है कि इस वर्ष होलिका दहन का अत्यंत शुभ मुहूर्त 2 मार्च की रात 11 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ हो रहा है। यह समय होलिका पूजन और दहन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहेगा, जब भक्तजन पूरे विधि-विधान से अग्नि प्रज्वलित कर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मना सकेंगे। होलिका दहन सिर्फ लकड़ियों का जलाना नहीं, बल्कि यह भक्त प्रहलाद की अटूट आस्था और भगवान विष्णु की महिमा का प्रतीक है। यह हमें संदेश देता है कि चाहे कितनी भी बड़ी बुराई क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। इस पवित्र अग्नि में हम अपनी बुराइयों, नकारात्मकता और कष्टों को भी भस्म करने का संकल्प लेते हैं।
होलिका दहन के बाद, रंगों का त्योहार धुलेंडी, 4 मार्च को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर, गुलाल मलकर और मिठाइयां खिलाकर अपनी खुशी का इजहार करेंगे। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई इस दिन पुरानी कटुता भुलाकर प्रेम और भाईचारे के रंग में रंग जाता है। काशी के विद्वानों द्वारा घोषित ये मुहूर्त न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ये सुनिश्चित करते हैं कि हम अपने त्योहारों को सही परंपरा और श्रद्धा के साथ मनाएं। यह जानकारी सभी भक्तों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगी, ताकि वे बिना किसी संशय के इस पावन पर्व का आनंद ले सकें। होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, यह जीवन में नए रंगों को भरने और संबंधों को मजबूत करने का एक अनुपम अवसर है।
