काशी के कैंपस में रंगों का उत्सव: छात्रों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर मचाया धमाल
आज बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के परिसरों में रंगों का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। होली का खुमार अभी उतरा नहीं था, या शायद छात्रों ने इसे फिर से जिंदा कर दिया था। सुबह से ही दोनों विश्वविद्यालयों के प्रांगणों में छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा। हवा में अबीर-गुलाल की खुशबू ऐसी घुल गई थी कि मानो पूरा वातावरण ही इंद्रधनुषी हो उठा हो। हर तरफ लाल, पीले, हरे, नीले रंगों की फुहारें उड़ रही थीं। छात्र एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिल रहे थे, उनकी हंसी और ठिठोली से पूरा परिसर गूंज रहा था।
कहीं ढोल-नगाड़ों की थाप पर तो कहीं डीजे के धमाकेदार गानों पर छात्र-छात्राएं बेसुध होकर नाच रहे थे। उनके चेहरे पर पढ़ाई का तनाव नहीं, बल्कि त्योहार की शुद्ध और अदम्य खुशी झलक रही थी। पारंपरिक गीतों से लेकर आजकल के लोकप्रिय गानों तक, हर धुन पर उनके कदम थिरक रहे थे। कुछ छात्र तो इतने मग्न थे कि अपने आसपास की सुधबुध खोकर बस संगीत की ताल पर झूम रहे थे। यह सिर्फ रंग खेलने या नाचने का दिन नहीं था, बल्कि यह दोस्ती, भाईचारे और एक-दूसरे के साथ जीवन के रंगों को साझा करने का दिन था।
बीएचयू के कला संकाय से लेकर काशी विद्यापीठ के मुख्य द्वार तक, हर जगह ऊर्जा और उत्साह की लहर दौड़ रही थी। सुरक्षाकर्मियों से लेकर फैकल्टी सदस्य भी इस खुशनुमा माहौल का हिस्सा बनते दिखे, हालांकि वे सीधे तौर पर रंग खेलने से बच रहे थे, पर उनके चेहरों पर भी मुस्कान थी। छात्रों ने अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हुए रंगों से एक-दूसरे के चेहरों पर कलाकृतियां भी बनाईं। यह पल सिर्फ मस्ती भरा नहीं था, बल्कि यह छात्रों के जीवन में ऐसे यादगार लम्हे जोड़ने वाला था, जिन्हें वे कॉलेज के दिनों की सुनहरी यादों के तौर पर हमेशा संजो कर रखेंगे। यह दिन साबित करता है कि शिक्षा के मंदिरों में भी जीवन के रंगों को पूरी उमंग के साथ जिया जाता है।
