कनाडाई प्रोफेसर अंजलि अवस्थी का IIT में व्याख्यान: बंदरगाह संचालन में स्वायत्त वाहनों की भूमिका
कनाडा की प्रतिष्ठित प्रोफेसर अंजलि अवस्थी ने हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में एक विशेष व्याख्यान दिया, जिसने तकनीकी नवाचार और भविष्य के रसद (logistics) में गहरी रुचि रखने वाले सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। उनका व्याख्यान बंदरगाह संचालन में स्वायत्त वाहनों (Autonomous Vehicles) की तेजी से बढ़ती भूमिका पर केंद्रित था, जो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में क्रांति लाने की क्षमता रखते हैं।
प्रोफेसर अवस्थी ने अपनी गहन जानकारी और शोध के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि आधुनिक बंदरगाहों के लिए कार्यकुशलता, सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता सर्वोपरि है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे स्वायत्त कंटेनर क्रेन, स्वचालित निर्देशित वाहन (AGVs) और यहां तक कि रोबोटिक ट्रक जैसे स्वायत्त समाधान इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं। इन प्रणालियों से न केवल संचालन में तेजी आती है, बल्कि मानवीय त्रुटियों और कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे बंदरगाह एक सुरक्षित और अधिक उत्पादक कार्यस्थल बन जाते हैं।
उन्होंने वैश्विक स्तर पर उन सफल बंदरगाहों के कई उदाहरण प्रस्तुत किए जहाँ स्वायत्त प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है, जिससे उनकी परिचालन क्षमता में भारी सुधार हुआ है। प्रोफेसर अवस्थी ने इस बात पर जोर दिया कि स्वायत्त वाहनों का उपयोग कार्गो की लोडिंग, अनलोडिंग, भंडारण और टर्मिनल के भीतर परिवहन जैसी विभिन्न गतिविधियों में किया जा सकता है, जिससे पूरी प्रक्रिया सुचारु और अधिक लागत प्रभावी हो जाती है।
हालांकि, उन्होंने इस तकनीक को अपनाने में आने वाली संभावित चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें भारी प्रारंभिक निवेश, मौजूदा प्रणालियों के साथ एकीकरण की जटिलता और एक मजबूत नियामक तथा कानूनी ढाँचे की आवश्यकता शामिल है। इसके बावजूद, उनका दृढ़ विश्वास था कि भविष्य के स्मार्ट बंदरगाह स्वायत्त और स्वचालित प्रणालियों पर ही आधारित होंगे। भारत जैसे विशाल समुद्री तटरेखा और बढ़ते समुद्री व्यापार वाले देश के लिए, इन अत्याधुनिक तकनीकों को समझना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहा जा सके।
प्रोफेसर अवस्थी का यह प्रेरणादायक व्याख्यान न केवल सूचनात्मक था बल्कि इसने भारतीय शैक्षणिक और औद्योगिक समुदाय के लिए स्वायत्त प्रणालियों के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के नए द्वार भी खोले। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्व को भी रेखांकित करता है, जो भविष्य की प्रौद्योगिकियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
