माता शीतला संगीत महोत्सव में गूंजी ‘नमामि गंगे’ की अलख

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माता शीतला संगीत महोत्सव, जो हर साल अपनी सांस्कृतिक छटा बिखेरता है, इस बार एक खास संदेश के साथ गूंज उठा। आदिशक्ति मां शीतला के पावन धाम में आयोजित इस भव्य संगीत समारोह में देश के कोने-कोने से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। लेकिन इस वर्ष की सबसे अनूठी बात थी “नमामि गंगे” अभियान की गूंज, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और जागरूकता के एक नए रंग में रंग दिया।

जैसे ही संगीत की मधुर धुनें फिजा में घुलने लगीं, श्रोताओं को माँ गंगा की महिमा और उसके संरक्षण के प्रति एक गहरा भाव महसूस हुआ। कई कलाकारों ने अपने भजनों और गीतों के माध्यम से गंगा की पवित्रता और उसके अविरल प्रवाह को बनाए रखने का संदेश दिया। ऐसा लग रहा था मानो गंगा स्वयं अपनी निर्मलता का आह्वान कर रही हो, और कलाकार उसकी आवाज़ बन गए हों।

महोत्सव के मंच से निकली ‘नमामि गंगे’ की यह गूंज केवल एक नारा नहीं थी, बल्कि यह जल संरक्षण और पर्यावरण शुद्धि के प्रति एक सामूहिक संकल्प का प्रतीक बन गई। उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस संदेश का स्वागत किया। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस पहल से जुड़ता हुआ दिखाई दिया। आयोजकों ने बताया कि यह प्रयास सांस्कृतिक आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह संगीत महोत्सव केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा मंच बन गया जहाँ आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। ‘नमामि गंगे’ की यह गूंज दर्शाती है कि हमारी परंपराएँ और पर्व हमें अपनी नदियों और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाते हैं। आशा है कि इस महोत्सव से निकली यह प्रेरणा दूर-दूर तक फैलेगी और ‘स्वच्छ गंगा-निर्मल गंगा’ के सपने को साकार करने में हम सभी अपनी भूमिका निभाएंगे।

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