भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां: शहनाई सम्राट की 110वीं जयंती पर विशेष
वाराणसी के हृदय में स्थित सिगरा की पावन भूमि पर, फरमान दरगाह में एक अनुपम शनिवार ने भारतरत्न शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 110वीं जयंती का दिव्य समारोह देखा। यह मात्र एक तिथि का स्मरण नहीं था, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के उस महान साधक को श्रद्धा सुमन अर्पित करने का एक भावपूर्ण अवसर था, जिनकी शहनाई की मधुर धुनें आज भी लाखों दिलों में गूंजती हैं।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, जिनके संगीत ने सरहदें मिटाकर मानवता का संदेश दिया, काशी की उस रूह से जुड़े थे जिसने उन्हें ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया। उनकी जयंती पर दरगाह का माहौल भक्ति और संगीत प्रेम से सराबोर था। हर तरफ उस्ताद की आत्मा को शांति देने वाली दुआएं और उनके जीवन की अनमोल विरासत को याद करने वाले बोल सुनाई दे रहे थे।
इस खास मौके पर, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे। उन्होंने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की मजार पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें नमन किया। यह एक ऐसा पल था जो राजनीति से परे, कला और संस्कृति के प्रति हमारी सामूहिक आदर भावना को दर्शाता है। अजय राय ने उस्ताद के संगीत को देश की अमूल्य धरोहर बताया और कहा कि उनकी धुनें हमें एकता और सद्भाव का पाठ पढ़ाती रहेंगी।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने अपनी शहनाई से न केवल भारतीय संगीत को एक नई ऊँचाई दी, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उनकी हर तान में काशी की आत्मा बसी थी, गंगा की पवित्रता और महादेव की दिव्यता का वास था। उनकी जयंती मनाना, दरअसल, उस सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है जिसे उन्होंने अपने जीवन और संगीत से सींचा। उनकी धुनें आज भी प्रेरणा देती हैं कि कैसे संगीत, धर्म और जाति की सीमाओं से परे होकर दिलों को जोड़ सकता है। यह जयंती हमें याद दिलाती है कि सच्चे कलाकार अमर होते हैं, और उनकी विरासत पीढ़ियों तक प्रकाश फैलाती रहती है।
