बीएचयू में महाभारत का जीवंत मंचन: संस्कृत, भरतनाट्यम और छाऊ का अद्भुत संगम

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वाराणसी की पवित्र धरती पर स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) सदैव कला और संस्कृति का केंद्र रहा है, जहाँ प्राचीन ज्ञान आधुनिक प्रस्तुतियों के साथ जीवंत होता है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित स्वतंत्रता भवन सभागार में हाल ही में एक ऐसा मनमोहक आयोजन हुआ, जिसने उपस्थित हर दर्शक को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह सिर्फ एक सामान्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि महाभारत काल की एक जीवंत, भावनात्मक और कलात्मक प्रस्तुति थी, जिसने 70 मिनट तक दर्शकों को अपनी जड़ों से जोड़े रखा और उन्हें एक अलग युग में ले गई।

मंच पर उतरे बीएचयू के प्रतिभाशाली विद्यार्थी, जिन्होंने अपनी कला और अथक समर्पण से एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक संध्या का निर्माण किया। इस अनूठी प्रस्तुति की सबसे बड़ी विशेषता थी संस्कृत संवादों का शुद्ध उच्चारण, भरतनाट्यम की शास्त्रीय लालित्यपूर्ण मुद्राएँ और छाऊ नृत्य शैली का ओजपूर्ण, शक्ति से भरपूर संयोजन। जहाँ संस्कृत के मधुर और भावपूर्ण संवादों ने दर्शकों को प्राचीन भारत की गौरवशाली भाषा और उसके गहन दर्शन से जोड़ा, वहीं भरतनाट्यम की सूक्ष्म भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं ने कथा के हर भावनात्मक और मार्मिक पहलू को साकार किया, जैसे द्रौपदी का चीर हरण या अर्जुन का मोह।

इसके साथ ही, छाऊ शैली, अपनी युद्ध कला और ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध, ने महाभारत के युद्ध दृश्यों, वीर गाथाओं और पात्रों के आंतरिक संघर्षों को एक नई, सशक्त और गतिशील ऊँचाई दी। विद्यार्थियों ने जिस कुशलता और संवेदनशीलता के साथ इन तीनों जटिल विधाओं का आपस में समन्वय स्थापित किया, वह उनकी गहन साधना, गुरुजनों के उत्कृष्ट मार्गदर्शन और कला के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रत्यक्ष प्रमाण था। हर कलाकार अपने निभाए गए किरदार में इस तरह डूबा हुआ था कि सभागार में बैठे दर्शक स्वयं को कुरुक्षेत्र के मैदान में किसी युद्ध का साक्षी या राजमहल के किसी महत्वपूर्ण दृश्य का हिस्सा महसूस कर रहे थे।

लगभग सत्तर मिनट तक चले इस कार्यक्रम में समय जैसे थम सा गया था; दर्शक न केवल अपनी सीटों पर स्थिर थे, बल्कि उनकी आँखें और मन मंच पर हो रही हर गतिविधि में पूर्णतया लीन थे। यह सिर्फ एक मनोरंजक कला प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक गहरा शैक्षिक और सांस्कृतिक अनुभव भी था, जिसने नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बीएचयू कला और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और उसे जीवंत रखने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह वास्तव में छात्रों के अद्भुत कौशल, गुरुओं के प्रेरणादायक मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय के समृद्ध सांस्कृतिक माहौल का एक अद्वितीय संगम था, जिसने दर्शकों के दिलों पर एक अमिट और चिरस्थायी छाप छोड़ी।

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