प्रेम और भक्ति की सुगंध: 5000 भक्तों ने कान्हा संग खेली फूलों की होली
वृंदावन की पावन भूमि पर एक ऐसा नज़ारा दिखा जिसने सभी का मन मोह लिया। फाल्गुन मास की मस्ती और प्रभु भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब 5000 से अधिक भक्तों ने अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के साथ फूलों की अनुपम होली खेली। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं था, बल्कि प्रेम, श्रद्धा और आनंद का एक ऐसा उत्सव था, जिसकी सुगंध दूर-दूर तक फैल गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। हर चेहरे पर कान्हा के दर्शन और उनके साथ होली खेलने की उत्सुकता साफ झलक रही थी। मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों और मनमोहक रोशनी से सजाया गया था, मानो स्वयं स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण की झांकी निकली, पूरा वातावरण “जय श्री कृष्णा” के जयकारों से गूंज उठा। फिर शुरू हुआ वो अलौकिक पल, जब भक्तों ने गुलाब, गेंदा, चमेली और अन्य सुगंधित फूलों की पंखुड़ियों से कान्हा के साथ होली खेलना शुरू किया। हवा में तैरती फूलों की खुशबू और भक्तों के चेहरों पर बिखरी हंसी ने पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया। हर भक्त अपनी सुध-बुध खोकर इस दिव्य लीला में लीन हो गया था। बच्चे, बड़े, युवा, वृद्ध – हर कोई कान्हा के रंग में रंग गया था। यह दृश्य इतना मनमोहक था कि हर किसी की आंखें नम हो गईं और हृदय आनंद से भर उठा। यह फूलों की होली केवल एक खेल नहीं थी, बल्कि भगवान और भक्तों के बीच अटूट प्रेम का एक पवित्र बंधन था, जो सदियों तक याद रखा जाएगा।
