तेज हवा का कहर: जनजीवन अस्त-व्यस्त, किसान चिंतित

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शुक्रवार की सुबह होते ही प्रकृति ने अपना एक अलग ही रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। सूरज की पहली किरणें जमीन पर पड़ भी नहीं पाई थीं कि हवा ने अपनी रफ्तार पकड़ी और देखते ही देखते 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी गति पर पहुंच गई। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था, बल्कि इसने पूरे जनजीवन को अपनी चपेट में ले लिया।

घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया था। धूल और मिट्टी का गुबार ऐसा कि आंखों में जलन होने लगे। पेड़-पौधे ऐसे झूल रहे थे मानो किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें पकड़ कर हिला दिया हो। गली-मोहल्लों में सन्नाटा पसर गया, जहां आमतौर पर चहल-पहल रहती थी, वहां लोग अपने घरों में दुबके रहने को मजबूर हो गए। सड़कों पर इक्का-दुक्का लोग ही हिम्मत कर निकल पा रहे थे, वे भी अपनी चाल धीमी कर किसी तरह आगे बढ़ रहे थे। बच्चों का खेल-कूद रुक गया, और बड़ों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई।

लेकिन इस तूफानी हवा का सबसे गहरा असर उन अन्नदाताओं पर पड़ा है, जिनकी नजरें हमेशा आसमान पर टिकी रहती हैं। खेतों में खड़ी गेहूं की लहलहाती फसल, जो कुछ ही दिनों में कटने को तैयार थी, अब इस तेज हवा के थपेड़ों से जमीन पर बिछ सी गई है। किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। उन्होंने खून-पसीने की कमाई और अथक परिश्रम से इस फसल को सींचा था। एक अच्छी पैदावार की उम्मीद में उन्होंने न जाने कितने सपने संजोए थे। अब उन्हें अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत बर्बाद होती दिख रही है। यह सिर्फ फसल का नुकसान नहीं, बल्कि उनके साल भर की कमाई और उनके बच्चों के भविष्य पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।

ईश्वर से यही प्रार्थना है कि यह प्राकृतिक आपदा जल्द टले और किसानों को इस भारी नुकसान से उबरने की शक्ति मिले। यह हवा मानो अपने साथ सबकी उम्मीदें भी उड़ा ले जा रही है, और हर कोई बस इसके थमने का इंतजार कर रहा है।

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