जिला अस्पताल में सीटी स्कैन का संकट: मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

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जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन का संकट गहराता जा रहा है, जिससे मरीजों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। लंबे समय से चली आ रही यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है और दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा न होने के कारण डॉक्टरों को अक्सर मरीजों को निजी लैब या बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह एक बड़ी समस्या है। एक तो वे पहले ही अपनी बीमारी से जूझ रहे होते हैं, ऊपर से महंगी जांचों का खर्च उठाना उनकी कमर तोड़ देता है। कई बार तो ऐसे भी मामले सामने आए हैं जब मरीज पैसे के अभाव में सीटी स्कैन नहीं करवा पाते और उनका इलाज अधर में लटक जाता है।

सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जांच का अभाव सही समय पर रोग का पता लगाने और उचित उपचार शुरू करने में बाधा डाल रहा है। मस्तिष्क संबंधी रोगों, अंदरूनी चोटों या अन्य गंभीर बीमारियों के निदान के लिए सीटी स्कैन अनिवार्य होता है। इसकी अनुपलब्धता से न केवल मरीजों की शारीरिक पीड़ा बढ़ती है, बल्कि उनके जीवन पर भी खतरा मंडराने लगता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को तो और भी ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। उन्हें न केवल महंगे किराए का भुगतान करके निजी लैब तक जाना पड़ता है, बल्कि कई बार तो एक से अधिक बार अस्पताल के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। यह सब उनके समय और धन दोनों का अपव्यय है।

प्रशासन को इस गंभीर विषय पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। जिला अस्पताल में जल्द से जल्द सीटी स्कैन मशीन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, चाहे वह नई मशीन लगाने की बात हो या पुरानी मशीन की मरम्मत की। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार और स्थानीय प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि इस संकट का शीघ्र समाधान होगा और मरीजों को राहत मिलेगी।

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