चुरावनपुर में ढाई बीघे का तालाब हुआ अतिक्रमण मुक्त: निगम की बड़ी कार्रवाई
चुरावनपुर गांव में स्थित करीब ढाई बीघे का ऐतिहासिक तालाब आखिरकार नगर निगम की कड़ी मशक्कत के बाद अतिक्रमण मुक्त हो गया। यह तालाब वर्षों से कुछ दबंगों और भू-माफियाओं के कब्जे में था, जिसके कारण इसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। स्थानीय लोगों की शिकायतें और पर्यावरण प्रेमियों की आवाज़ को गंभीरता से लेते हुए, नगर निगम ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का फैसला किया।
सोमवार को सुबह से ही निगम की टीम, पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। भारी संख्या में जेसीबी और अन्य मशीनें भी साथ थीं। अतिक्रमणकारियों ने पहले तो विरोध का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी और निगम अधिकारियों की दृढ़ता के सामने उनकी एक न चली। देखते ही देखते, अवैध रूप से बनी दीवारें, बाड़ और कच्चे-पक्के निर्माण ध्वस्त कर दिए गए। तालाब की चारों तरफ से बनी अवैध बाउंड्री को हटा दिया गया और उसके मूल स्वरूप को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
यह सिर्फ एक तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराना नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और जनहित की जीत है। चुरावनपुर के बुजुर्ग बताते हैं कि यह तालाब कभी गांव की पहचान हुआ करता था, जहां न सिर्फ पशु-पक्षी पानी पीने आते थे, बल्कि ग्रामीण भी गर्मियों में इसकी ठंडी हवा का आनंद लेते थे। धीरे-धीरे कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के चलते इस पर कब्जा करना शुरू कर दिया, जिससे इसका क्षेत्रफल सिकुड़ता चला गया और यह एक गंदे नाले का रूप लेने लगा था।
निगम अधिकारियों ने बताया कि इस तालाब के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसे फिर से गहरा किया जाएगा, चारों ओर हरियाली और बेंच लगाए जाएंगे, ताकि यह फिर से गांव वालों के लिए एक खूबसूरत और उपयोगी स्थान बन सके। इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश गया है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय लोगों ने निगम के इस कदम की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि ऐसे ही अन्य सार्वजनिक स्थलों को भी अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। यह तालाब अब न सिर्फ पानी के स्रोत के रूप में काम करेगा, बल्कि भूजल स्तर को बढ़ाने और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
