काशी के सोमरु ने मिर्जापुर के रणजीत को ढाक दांव से हराया
वाराणसी के ऐतिहासिक अखाड़े में आज एक ऐसा दंगल सजा, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक फैल गई। काशी के धुरंधर पहलवान सोमरु और मिर्जापुर के रणजीत, दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों के गौरव थे। हजारों की भीड़ अपनी साँसें थामे इस मुकाबले का इंतज़ार कर रही थी। ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘जय बजरंगबली’ के नारों से पूरा वातावरण गूँज रहा था।
जैसे ही सीटी बजी, दोनों पहलवान एक-दूसरे से भिड़ गए। रणजीत अपनी फुर्ती और दांव-पेंच के लिए जाने जाते थे, वहीं सोमरु अपनी ताकत और धैर्य के लिए विख्यात थे। शुरुआती पल एक-दूसरे को परखने में गुजरे। दोनों ने कई बार एक-दूसरे को उठाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी कामयाब नहीं हो पा रहा था। दर्शकों में रोमांच बढ़ता जा रहा था। कभी रणजीत हावी होते दिखते, तो कभी सोमरु अपनी पकड़ मजबूत कर लेते। यह सिर्फ एक कुश्ती नहीं, बल्कि दो शहरों की इज्जत का सवाल था।
लगभग पंद्रह मिनट तक चले इस कड़े मुकाबले के बाद, सोमरु ने एक निर्णायक चाल चली। रणजीत को करीब से जकड़ते हुए, उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाई और अचानक ‘ढाक’ दांव लगा दिया। यह दांव इतना सटीक और बिजली की फुर्ती से लगाया गया कि रणजीत को संभलने का मौका ही नहीं मिला। हवा में उछलते ही रणजीत धड़ाम से पीठ के बल मैट पर आ गिरे।
रेफरी ने तुरंत सीटी बजाई और सोमरु को विजेता घोषित किया। अखाड़ा तालियों की गड़गड़ाहट और सोमरु के जयकारों से गूँज उठा। काशी के इस लाल ने एक बार फिर अपनी माटी का मान बढ़ाया था। रणजीत भले ही हार गए थे, लेकिन उन्होंने भी सोमरु को कड़ी टक्कर दी थी। सोमरु ने हाथ जोड़कर दर्शकों का अभिवादन किया और अपने गुरु का आशीर्वाद लिया। यह जीत सिर्फ एक पहलवान की नहीं, बल्कि अथक परिश्रम और अटूट लगन की जीत थी।
